PM मोदी आज करेंगे फलस्तीन का दौरा, यहां के एक पिता को है पीएम मोदी से खास उम्मीद

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रामल्लाह (एजेंसी)। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार दिवसीय अरब देशों के दौरे पर हैं। आज वे फलस्तीन के रामल्लाह का दौरा करेंगे। इसके पहले आपको बता दें कि फलस्तीन के रामल्लाह के एक पिता को पीएम मोदी से है एक खास उम्मीद। दरअसल 50 वर्षीय बासेम तामिमि के लिए आज का दिन बेहद उम्मीदों से भरा है, वे पीएम मोदी से एक अपील करना चाहते हैं।

वे बताते हैं कि उनकी 17 वर्षीय बेटी अहेद और उसकी पत्नी नरीमन को इजरायली सेना ने कैद कर लिया है। और अब वे पीएम मोदी से अपील करना चाहते हैं कि वे इजरायल पर दबाव बनायें कि वे उनकी बेटी और पत्नी को रिहा कर दें। वे बताते हैं कि दो महीने पहले शुक्रवार को अहेद तामिमि और नरीमन को इजरायली बलों ने उसके अपने घर से गिरफ्तार कर लिया था। पिछले एक महीने से अरब देशों में अहेद को रिहा करने की सोशल मीडिया पर मुहिम छिड़ गई है। इस दौरान प्रदर्शन में बासेम को नौ बार जेल की सजा भी काटनी पड़ी है। बासेम कहते हैं कि, जब मैं उसके रूम में गया, तो मैंने देखा कि मेरी बेटी दुश्मनों के हाथ में थी। मैं दुखी था और काफी डरा हुआ था। आज पीएम मोदी के रामल्लाह पहुंचने के एक दिन पहले 50 वर्षीय यह शख्स अपनी भावुक याचिका लेकर तैयार है। उन्होनें कहा- मैं चाहता हूं पीएम मोदी इजरायल पर दबाव डालें कि वो फलस्तीन से अपना कब्जा हटा लें और फलस्तीनी नागरिकों खासकर 350 बच्चों को रिहा भी कर दें। हालांकि अभी तक पीएम मोदी के साथ बासेम की आधिकारिक मुलाकात की कोई योजना नहीं है।
तामिमि की आवाजें फलस्तीन के घरों और गलियों में गूंज रही है। बता दें कि पीएम मोदी फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास से आज सुबह मुलाकात करने वाले हैं यहां से वे रामल्लाह भी जायेंगे। यहां वे यासर अराफात म्यूजियम का भी दौरा करेंगे साथ ही वे फलस्तीनी नेताओं के स्मारकों पर भी श्रद्धांजलि देंगे।

तामिमि के घर में अहेद के अलावा 21 वर्षीय भाई वाद, 14 वर्षीय मोहम्मद और दूसरा 11 वर्षीय सलीम है। बासेम का घर पूरी तरह से बिखरा पड़ा है। हालांकि नरीमन की बहन नवल घर पर हैं जो बच्चों की देखभाल कर रही है। बासेम कहते हैं कि हम हीरो नहीं बनना चाहते हैं हम बस शांति से जीना चाहते हैं।

फलस्तीनियों का कहना है कि, हम एक सामान्य जिंदगी जीना चाहते हैं इसलिए हम इजरायलियों के कब्जे से आजादी चाहते हैं। हमारी मुख्य चिंता पुनर्स्थापन है। बेथलेहम जीसस क्राइस्ट का जन्मस्थान माना जाता है, यहां एक प्रसिद्ध चर्च के पास एक दीवार है जो इजरायल और फलस्तीन को अलग करता है।

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