BJP वाशिंग मशीन है, दागदार नेताओं के आरोपों को धो देती है: कन्हैया कुमार

0
187

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा को वाशिंग मशीन बताते हुए  कहा कि यह दल अपने नेताओं के अपराधिक आरोपों को धो देता है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस नेता हिंसा और घृणा फैलाने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने युवाओं से इनके जाल में नहीं फंसने की अपील की. युवा हुंकार रैली को संबोधित करते हुए ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) के कार्यकर्ता कुमार ने कहा, “लोकसभा में भाजपा के कई सांसद हैं जिनके खिलाफ मामले चल रहे हैं. भाजपा कोई दल नहीं है बल्कि वह वाशिंग मशीन है जो अपने नेताओं के खिलाफ लगे आपराधिक आरोपों को साफ करने का काम करती है.

”उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा, “ चाहे कितने ही कठिनाइयों से आप गुजर रहे हों या कितने ही क्रोधित आप हों, इनके जाल में मत फंसें. ” कुमार ने कहा, “ कोई भी धार्मिक किताब पढ़ें तो आप पाएंगे कि सभी में कहा गया है कि प्रत्येक व्यक्ति में भगवान होता है. राजस्थान में जिसने अफराजुल की हत्या की उसने उसके अंदर के भगवान को भी मार डाला.”

जिग्नेश मेवाणी की युवा हुंकार रैली
दिल्‍ली पुलिस द्वारा गुजरात के वडगाम के विधायक जिग्नेश मेवाणी को संसद मार्ग पर युवा हुंकार रैली करने की इजाजत न दिए जाने के बावजूद वह अपने समर्थकों के साथ जंतर-मंतर के पास रैली की. उन्‍होंने कहा है कि ‘मैं विधायक हूं, अपनी बात जरूर कहूंगा’. इस दौरान जिग्‍नेश के साथ भारी संख्‍या में उनके समर्थक यहां मौजूद हैं. ऐहतियातन संसद मार्ग पर भारी संख्‍या में सुरक्षा बल की तैनाती की गई है. सूत्रों का कहना है कि अगर जिग्‍नेश मार्च करते हैं तो उन्‍हें हिरासत में लिया जाएगा.  इससेे पहले जिग्‍नेश के सहयोगी अखिल गोगोई ने कहा कि ‘हम रैली करेंगे’. दिल्‍ली पुलिस ने एनजीटी का हवाला देते हुए उन्‍हें इजाजत नहीं दी. रैली को दिल्‍ली पुलिस से इजाजत न मिलने पर जिग्‍नेश मेवाणी ने न्‍यूज एजेंसी ANI से कहा कि ‘दुर्भाग्यपूर्ण. हम सिर्फ लोकतांत्रिक और शांतिपूर्वक तरीके से प्रदर्शन करने जा रहे थे, लेकिन सरकार हमें निशाना बना रही है. एक निर्वाचित प्रतिनिधि को बोलने की अनुमति नहीं दी जा रही है’.

दरअसल, दिल्ली पुलिस की तरफ से संसद मार्ग पर रैली के लिए वडगाम के विधायक जिग्नेश मेवाणी के अनुरोध को नामंजूर करने के बाद भी दलित नेता और गुजरात से पहली बार विधायक बने जिग्नेश मेवाणी संसद मार्ग से पीएम निवास तक ‘युवा हुंकार रैली’  रैली करने पर अड़े रहे. जिग्नेश मेवाणी की ‘युवा हुंकार रैली’ से पहले क्षेत्र में पोस्टर देखे गए.

जिग्नेश मेवाणी ने भी ट्वीट कर बीजेपी को चुनौती दी
जिग्नेश मेवाणी ने भी ट्वीट कर बीजेपी को चुनौती दी. जिग्नेश ने लिखा कि ‘बांध ले बिस्तर बीजेपी, राज अब जाने को है, ज़ुल्म काफ़ी कर चुके, पब्लिक बिगड़ जाने को है’. दिल्ली पुलिस के डीसीपी ने ट्वीट कर जानकारी दी कि आयोजकों को किसी और जगह पर जाने का सुझाव दिया जा रहा है, लेकिन आयोजक मान नहीं रहे हैं. सामाजिक न्याय’ रैली या ‘युवा हुंकार रैली’ की योजना तैयार की गई थी, जिसे मेवाणी और असम के किसान नेता अखिल गोगोई संबोधित करेंगे.एनजीटी ने पिछले साल पांच अक्तूबर को अधिकारियों को जंतर मंतर रोड पर धरना, प्रदर्शन, लोगों के जमा होने, भाषण देने और लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल संबंधी गतिविधियां तत्काल रोकने का आदेश दिया था.

9 जनवरी को समाजिक न्याय रैली
मेवाणी ने कहा था, ‘खुद को आंबेडकरवादी बताने वाले पीएम मोदी चुप क्यों हैं? उन्हें अपना रुख साफ करना चाहिए कि दलितों को शांतिपूर्ण तरीके से रैलियां करने का हक है कि नहीं’. मेवाणी ने बताया था कि 9 जनवरी को आहूत अपनी सामाजिक न्याय के लिए युवा हुंकार रैली के दौरान वह मनुस्मृति एवं संविधान की प्रतियां लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) जाएंगे और मोदी से कहेंगे कि वह दोनों में से किसी एक को चुनें.

जिग्नेश और उमर खालिद पर भड़काउ भाषण का केस
गौरतलब है कि बीते 31 दिसंबर को पुणे में भीमा कोरेगांव की लड़ाई के 200 साल पूरे होने की याद में आयोजित कार्यक्रम ‘एलगार परिषद’ में मेवाणी और जेएनयू में देश विरोधी नारे लगाने वाले कश्मीरी छात्र उमर खालिद ने हिस्सा लिया था. पुणे के एक निवासी की ओर से दाखिल शिकायत के मुताबिक, उनके ‘‘भड़काऊ’’ भाषणों का मकसद समुदायों के बीच दुर्भावना पैदा करना था, जिसकी वजह से एक जनवरी को भीमा कोरेगांव में हिंसा हुई.

बीजेपी संघ बना रहे हैं निशाना 
जिग्नेश मेवाणी ने इस आरोप को नकारा कि पुणे में उन्होंने भड़काऊ भाषण दिया. उन्होंने कहा कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) उन्हें निशाना बना रहे हैं. मेवाणी ने कहा, ‘‘न तो मैंने कोई भड़काऊ भाषण दिया और न ही महाराष्ट्र में बंद में हिस्सा लिया. किसी संवैधानिक विशेषज्ञ को मेरे भाषण का विश्लेषण करने और कुछ भी अभद्र ढूंढने को कहें.’’

मेवाणी ने कहा कि 31 दिसंबर को हुई जनसभा के बाद उन्हें माइग्रेन (सिरदर्द) हो गया. उन्होंने कहा, ‘‘जनसभा के बाद मुझे भयंकर माइग्रेन हो गया. न तो मैंने मुंबई में किसी गतिविधि में हिस्सा लिया, न ही बंद में हिस्सा लिया और न ही भीमा कोरेगांव गया.’’  भाजपा और संघ (आरएसएस) मुझे निशाना बना रहे हैं.

उमर खालिद ने कहा था कि हिंसा का वीडियो साक्ष्य होने के बावजूद यह हास्यास्पद है कि हमें निशाना बनाया जा रहा है. यह संभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे से ध्यान भटकाने के एजेंडे का हिस्सा है. समस्त हिंदू अघाड़ी के एकबोटे और शिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान के भिड़े भीमा कोरेगांव में हिंसा सुनियोजित तरीके से कराने के आरोपों से घिरे हैं .उमर खालिद ने कहा कि महाराष्ट्र में जनवरी 2014 में हुई एक रैली में मोदी ने संभाजी भिड़े को तपस्वी या महापुरुष कहा था और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद थे.

भीमा-कोरेगांव हिंसा के बाद मुंबई बंद
200 साल पहले लड़ी गई लड़ाई की वर्षगांठ पर हुई हिंसा के विरोध में दलित संगठनों की ओर से कराए गए बंद के कारण तीन जनवरी को महाराष्ट्र में आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया था. दलित संगठन भीमा कोरेगांव की लड़ाई में महाराष्ट्र के पेशवा के खिलाफ अंग्रेजों की जीत को याद करते हैं, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि महार समुदाय के सैनिक ईस्ट इंडिया कंपनी के बलों का हिस्सा थे. पेशवा ब्राह्मण थे और भीमा कोरेगांव की लड़ाई में मिली इस जीत को दलितों की जीत के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here