’30 हजार का पिज्जा खाने वाले राहुल गांधी को 12,000 की नौकरी नहीं दिखाई देती’

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अहमदाबाद: केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस पर चुटकी लेते हुए कहा कि जो लोग 30,000 रुपये का पिज्जा खाते हैं उन्हें 12,000 रुपये की नौकरी नहीं दिखाई पड़ती है. स्पष्ट तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं उन लोगों को दिखाना चाहता हूं कि एक नौकरी कैसे पैदा की जाती है. जिन लोगों ने गरीबी नहीं देखी और इसके बारे में जानने के लिए रात के अंधेरे में कलावती के घर जाते हैं वह कहते हैं कि रोजगार नहीं है.’

सिंह ने कहा, ‘हमने चार करोड़ लोगों को नौकरी दी. यह अलग बात है कि उनमें से 70 प्रतिशत नौकरियां 12,000 प्रति माह से कम वेतन वाली थी.’ हालिया दौर में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार कह रहे हैं कि मोदी सरकार में देश में रोजगार के अवसर पैदा नहीं हो पाए हैं. उनके इसी बयान पर गिरिराज सिंह ने हमला किया है.

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम राज्य मंत्री गिरिराज सिंह ने देश में किसानों के आंदोन को ‘कांग्रेस की साजिश’ करार दिया है. गिरिराज ने कहा, “देश के कई हिस्सों में किसानों द्वारा जारी आंदोलन कांग्रेस की साजिश है.” उन्होंने कहा कि किसानों के आंदोलन का कुछ लोग ही समर्थन कर रहे हैं. किसानों का 10 दिवसीय आंदोलन एक जून से शुरू हुआ है. किसान कृषि उत्पादों के लिए उचित मूल्य के साथ ही ऋण माफी की मांग कर रहे हैं.

केंद्रीय लघु व मध्यम उद्योग राज्यमंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि आज देश में बहुसंख्यक समाज को कमजोर करने की साजिश चल रही है. उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी पर बहुसंख्यक समाज को कमजोर कर देश को टुकड़ों में बांटने की साजिश रचने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा कि ऐसा क्यों हो रहा है कि जहां बहुसंख्यक हिंदू कमजोर हो रहा है, वहीं सामाजिक समरसता टूट रही है. बहुसंख्यक हिंदू को ‘कमजोर’ बताने वाले केंद्रीय मंत्री शुक्रवार को प्रतापगढ़ जाते समय कुछ देर के लिए यहां के सर्किट हाउस में रुके.

कहा जाता है कि मोदी विरोधियों को पाकिस्तान भेज देने की धमकी देकर गिरिराज प्रधानमंत्री की नजर पर चढ़े और इनाम के तौर पर केंद्रीय मंत्री बनाए गए. गिरिराज ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “कांग्रेस व राहुल गांधी साजिश के तहत सामाजिक समरसता को कमजोर करते हुए हिंदुओं को आपस में बांटने का काम कर रहे हैं.”

मीडिया की मानें तो रामनवमी के मौके पर सांप्रदायिक हिंसा की साजिश पहले से रची गई थी. पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रामनवमी के जुलूस में हथियार लाने से मना किया था, लेकिन भाजपा, विहिप व बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने हथियार लेकर जुलूस निकाला और जमकर अपना मकसद साधा. ऐसा ही बिहार में भी किया गया.

गिरिराज ने कहा कि कांग्रेस ने कर्नाटक में बहुसंख्यक हिंदुओं को बांटने की कोशिश की. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी गुजरात में जनेऊ पहन लेते हैं. वहीं कर्नाटक में कांग्रेस बीफ की पार्टी कराती है.

उन्होंने कहा कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी की मानसिकता है कि देश टुकड़े-टुकड़े में बंट जाए. कांग्रेस की ये साजिश देशहित में नहीं है. कांग्रेस देश में हिंदुओं को कमजोर करना चाहती है और इसके लिए सोनिया और राहुल गांधी ही पूरी तरह से जिम्मेदार हैं.

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “देश में अवार्ड वापसी वाले लोग चाहते हैं कि हिंदू समाज खंडित हो जाए और भाजपा चाहती है कि पूरा समाज एक हो और सनातन धर्म एकजुट हो. देश खंडित न हो. देश का इमोशन राष्ट्र व एकता के साथ सबके साथ जुड़ा रहे.”

रामनवमी पर बिहार व पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा पर गिरिराज सिंह ने कहा, “मैं लगातार बाहर हूं और बगैर पूरी जानकारी के कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकता हूं.”

उप्र सरकार द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम के साथ ‘रामजी’ शब्द जोड़े जाने को उन्होंने सही ठहराया और कहा, “इसमें कुछ भी गलत नहीं है. लोग बेवजह सवाल उठा रहे हैं. अंबेडकर नाम पर किसी का एकाधिकार नहीं है, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर हम सब के हैं.”

डॉ. अंबेडकर हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध हो गए थे. क्यों? इसका जवाब गिरिराज भले ही न दे पाएं, लेकिन 30 मार्च को ही गुजरात से आई एक खबर में इसका जवाब ढूंढा जा सकता है. भावनगर जिले में कुछ ऊंची जाति के लोगों ने घोड़ा रखने और घुड़सवारी करने पर एक दलित की हत्या कर दी.

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