22 साल की उम्र में 14 गोल्ड, 2 सिल्वर मेडल और 3 अवॉर्ड… यही है युवा डॉक्टर अपराजिता की पहचान

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फिर चाहे गूगल जैसी दिग्गज कंपनियों में भारतीयों की मौजूदगी हो या फिर दुनिया के सबसे युवा डॉक्टर का रिकॉर्ड… सभी जगह भारत का डंका बज चुका है। अभी तक सबसे युवा डॉक्टर का रिकॉर्ड एक NRI भारतीय बाला मुरली अंबाति के नाम पर है, जो 17 साल और 294 दिन में डॉक्टर बनकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बना चुके हैं।
गौरतलब है कि 23 दिसंबर को केजीएमयू के दीक्षांत समारोह में यूपी की डॉ. अपराजिता को 16 गोल्ड मेडल और 3 अवॉर्ड मिले। इसमें KGMU के 3 सर्वोच्च मेडल भी शामिल हैं। 106 साल के इतिहास में यह तीनों मेडल किसी एक ही स्टूडेंट को नहीं मिले। 23 दिसंबर को संपन्न हुए KGMU के दीक्षांत समारोह में डॉ़ अपराजिता को चांसलर, हीवेट और यूनिवर्सिटी ऑनर समेत 14 गोल्ड, दो सिल्वर मेडल व तीन अन्य अवॉर्ड मिले।
एमबीबीएस में हर साल किया टॉप : हीवेट मेडल MBBS के फाइनल इयर टॉपर को दिया जाता है। चांसलर और यूनिवर्सिटी ऑनर मेडल MBBS के पांचों वर्षों में टॉप करने वाले स्टूडेंट को दिया जाता है। इंदिरानगर में रहने वाली डॉ.अपराजिता चतुर्वेदी ने MBBS के पांचों वर्षों में टॉप किया है। उन्होंने साल 2016 में MBBS पूरा किया।

डॉ. अपराजिता के पिता अजीत चतुर्वेदी आकाशवाणी में काम करते हैं, जबकि मां किरन गृहिणी हैं। अजीत चतुर्वेदी ने बेटी की इस उपलब्धि को पूरे परिवार के लिए सम्मान बताया। अपराजिता ने इंदिरानगर के आरएलबी स्कूल से 2012 में इंटर पास किया था। किसी कोचिंग की मदद लिए बिना उन्होंने उसी साल सीपीएमटी क्वॉलिफाई किया। लड़कियों में उसकी 15 वीं रैंक आई थी।
डॉ.अपराजिता ने बताया कि उन्होंने पढ़ाई बिना कोई टेंशन लिए मौज-मस्ती के साथ की है। रोजाना पांच घंटे पढ़ती थी। इस दौरान पूरा फोकस पढ़ाई पर रहता था। सब्जेक्ट को समझा है, रट्टा नहीं मारा है। कहा कि वह ब्रेन पर शोध कर न्यूरोसर्जन बनना चाहती हैं। न्यूरोसर्जरी में मास्टर्स और सुपर स्पेशियलिटी की डिग्री हासिल कर लखनऊ में ही प्रैक्टिस करेंगी।

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