1,000 से अधिक मेघालय निवासी आधार से अपनी निजी जानकारी को क्यों मिटाना चाहते हैं ?

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सुप्रीम कोर्ट वर्तमान में आधार की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक बड़ी याचिका पर सुन कर रहा है लेकिन मेघालय में 1,202 लोगों ने यूआईआईडीएआई को लिखा है आधार की वेबसाइट से उनकी निजी जानकारी को हटा दिया जाये. इन लोगों का कहना है कि यह निजी जानकारी नामांकन के समय उनकी सहमति के बगैर ली गयी है.

यूआईडीएआई को लिखे एक ईमेल में इन लोगों ने उन संगठनों के बारे में जानकारी भी मांगी है जिनके साथ आधार नंबर साझा किए गए हैं. सूत्रों के अनुसार निवासियों का कहना है कि उनकी सहमति नामांकन के दौरान नहीं ली गई थी. यहां तक कि उन मामलों में जहां उन्होंने सहमति दी थी, वे अब अपनी सहमति वापस लेना चाहते हैं.

हालांकि यूआईडीएआई को अक्सर आधार डेटा रद्द करने के लिए समान अनुरोध मिलते रहते हैं. चूंकि आधार अधिनियम 2016 में सरेंडर के लिए कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए इन लोगों को सूचित किया गया है कि वे किसी भी दुरुपयोग को रोकने के लिए अपनी बायोमेट्रिक्स लॉक कर सकते हैं.

UIDAI ने एक जवाब में कहा है कि एक नागरिक के रूप में किसी को भी राज्य (या इसके कानूनों) से बाहर जाने का कोई अधिकार नहीं है. कुछ लोग आयकर अधिनियम को पसंद नहीं कर सकते हैं और अपने पैन कार्ड डेटा को मिटा सकते हैं. तो क्या वे अपने जन्म प्रमाणपत्र, कॉलेज या स्कूल की डिग्री या पासपोर्ट के विवरण को समाप्त करने का अनुरोध कर सकते हैं?”

इससे पहले कर्नाटक के मैथ्यू थॉमस ने आधार कानून की संवैधाानिक वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उन्होंने कहा था कि यह निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है और बायोमेट्रिक प्रणाली ठीक ढंग से काम नहीं कर रही है.

सुप्रीम कोर्ट वर्तमान में आधार की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक बड़ी याचिका पर सुन कर रहा है लेकिन मेघालय में 1,202 लोगों ने यूआईआईडीएआई को लिखा है आधार की वेबसाइट से उनकी निजी जानकारी को हटा दिया जाये. इन लोगों का कहना है कि यह निजी जानकारी नामांकन के समय उनकी सहमति के बगैर ली गयी है.

यूआईडीएआई को लिखे एक ईमेल में इन लोगों ने उन संगठनों के बारे में जानकारी भी मांगी है जिनके साथ आधार नंबर साझा किए गए हैं. सूत्रों के अनुसार निवासियों का कहना है कि उनकी सहमति नामांकन के दौरान नहीं ली गई थी. यहां तक कि उन मामलों में जहां उन्होंने सहमति दी थी, वे अब अपनी सहमति वापस लेना चाहते हैं.

हालांकि यूआईडीएआई को अक्सर आधार डेटा रद्द करने के लिए समान अनुरोध मिलते रहते हैं. चूंकि आधार अधिनियम 2016 में सरेंडर के लिए कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए इन लोगों को सूचित किया गया है कि वे किसी भी दुरुपयोग को रोकने के लिए अपनी बायोमेट्रिक्स लॉक कर सकते हैं.

UIDAI ने एक जवाब में कहा है कि एक नागरिक के रूप में किसी को भी राज्य (या इसके कानूनों) से बाहर जाने का कोई अधिकार नहीं है. कुछ लोग आयकर अधिनियम को पसंद नहीं कर सकते हैं और अपने पैन कार्ड डेटा को मिटा सकते हैं. तो क्या वे अपने जन्म प्रमाणपत्र, कॉलेज या स्कूल की डिग्री या पासपोर्ट के विवरण को समाप्त करने का अनुरोध कर सकते हैं?”

इससे पहले कर्नाटक के मैथ्यू थॉमस ने आधार कानून की संवैधाानिक वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उन्होंने कहा था कि यह निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है और बायोमेट्रिक प्रणाली ठीक ढंग से काम नहीं कर रही है.

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