सरकारी बैंकों को मिलेगी 83,000 करोड़ रुपए पूंजी

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सरकारी बैंकों को मिलेगी 83,000 करोड़ रुपए पूंजी

दिलेर समाचार, नई दिल्ली। बैंकों का पूंजी आधार मजबूत बनाने के लिए सरकार चालू वित्त वर्ष के शेष महीनों में सरकारी बैंकों में 83,000 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। इस पूंजी का बड़ा हिस्सा पीसीए (प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन) के दायरे में फंसे उन बैंकों को जाएगा, जिनके प्रदर्शन में पिछले कुछ समय के दौरान सुधार दिखा है। साथ ही उन बैंकों को भी पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी, जिन पर पीसीए के दायरे में फिसलने का खतरा मंडरा रहा है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इस निवेश के साथ ही चालू वित्त वर्ष में बैंकों में हो रहे निवेश का कुल आंकड़ा 1.06 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा। इससे सरकारी बैंकों की उधार देने की क्षमता बढ़ेगी। साथ ही उन्हें पीसीए श्रेणी से बाहर निकलने में भी मदद मिलेगी। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 65,000 करोड़ रुपए के निवेश की घोषणा की थी। इसमें 23,000 करोड़ रुपए जारी कर दिए गए हैं, जबकि 42,000 करोड़ रुपए का निवेश अभी बाकी है।

इस बीच सरकार ने गुरुवार को संसद में अनुपूरक मांग पेश की। इसमें भी बैंकों में निवेश के लिए अतिरिक्त 41,000 करोड़ रुपए की मांग है। यह राशि बैंकों को रीकैपिटलाइजेशन (दोबारा पूंजी निवेश की प्रक्रिया) बांड्स के माध्यम से दी जाएगी और यह अक्टूबर 2017 में घोषित 2.11 लाख करोड़ रुपए के रीकैपिटलाइजेशन के अतिरिक्त होगी।

उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2017 में सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को दो साल के भीतर 2.11 लाख करोड़ रुपए पूंजी उपलब्ध कराने की योजना बनाई थी। इसमें से 18,139 करोड़ रुपए बजट के जरिए तथा 1.35 लाख करोड़ रुपए रीकैपिटलाइजेशन बांड्स के जरिए दी जानी थी। शेष राशि बाजार से जुटाने की योजना थी। सरकार को उम्मीद है कि अगले वर्ष मार्च तक सरकारी बैंक बाजार से 58,000 करोड़ रुपए जुटा लेंगे।

मगर, अब तक बैंक इसमें से 24,000 करोड़ रुपए ही जुटाने में कामयाब रहे हैं। जेटली ने कहा कि सरकार उन बैंकों को भी पूंजी उपलब्ध कराएगी, जिन्हें आरबीआई ने पीसीए कैटेगरी में डाला हुआ है, लेकिन हाल के दिनों उनका प्रदर्शन बेहतर रहा है। इन बैंकों में पूंजी निवेश के जरिए उन्हें पीसीए से बाहर निकालने में मदद मिलेगी। इसके साथ-साथ पीसीए की दहलीज पर खड़े बैंकों के अलावा विलय के लिए तैयार बैंकों में भी निवेश किया जाएगा। इस साल सरकार ने बैंक ऑफ बड़ौदा, देना बैंक और विजया बैंक के विलय का ऐलान किया है।

रिजर्व बैंक ने 21 सरकारी बैंकों में से 11 को पीसीए कैटेगरी में डाल दिया है। पीसीए कैटेगरी में जिन बैंकों को डाला जाता है, उन पर उधार देने तथा नई नियुक्तियों सहित कई कार्यों पर बंदिशें लग जाती हैं। जेटली ने कहा कि सरकारी बैंकों में फंसे कर्ज (एनपीए) की पहचान का काम पूरा हो चुका है। यह काम 2015 में शुरू हुआ था। सरकारी बैंकों का सकल एनपीए मार्च 2018 में उच्चतम स्तर पर पहुंचकर अब घटने लगा है।

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में सकल एनपीए में 23,860 करोड़ रुपए की कमी आई है। बैंकिंग सचिव राजीव कुमार ने कहा कि चार बैंकों- एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन बैंक और विजया बैंक को शायद चालू वित्त वर्ष में सरकार से पूंजी लेने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि पीएनबी पूंजी पाने वालों की दौड़ में शामिल हो सकता है। कुमार ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में बैंकों ने अब तक 60,726 करोड़ रुपए फंसा कर्ज वसूला है, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुना है।

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