शोले रिलीज होने के 43 साल के बाद सिप्पी ने किया बड़ा खुलासा

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मुंबई। 1975 में आई शोले की यादें फिर ताजा हो गई हैं। पुणे इंटरनेशल फिल्म फेस्टिवल में सम्मानित हुए फिल्म के निर्देशक रमेश सिप्पी ने एक सवाल के जवाब में बताया कि उन्होंने शोले का अंत अलग तरह से शूट किया था। उस सीन में ठाकुर (संजीव कुमार) गब्बर सिंह ( अमजद खान) को कील लगे अपने जूते से कुचल कर मार देता है। ‘तेरे लिए तो मेरे पैर ही काफी हैं’ डायलॉग आज भी इसी कारण फेमस है, लेकिन सेंसर बोर्ड ने इस पर ऐतराज किया था। सिप्पी कहते हैं कि उन्हें समझ ही नहीं आया कि वो क्या करें। ठाकुर मारे भी तो कैसे, पिस्तौल या बंदूक से तो मार नहीं सकता। उसके तो हाथ ही नहीं थे। सेंसर को फिल्म में इतनी ज्यादा हिंसा भी पसंद नहीं थी। हम पूरी तरह सेंसर के फैसले के खिलाफ थे। अंत में हमें क्लाईमैक्स बदलना ही पड़ा।

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