लाखों बच्चों का भविष्य खतरे में, इस उम्र के स्टूडेंट नहीं दे पाएंगे NEET की परीक्षा

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अगर आप भी NEET की परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल एलिजिबिलिटी ऐंड एंट्रेंस टेस्ट (NEET) की परीक्षा अब वो स्टूडेंट ही दे पाएंगे जिनकी उम्र 25 से कम हो। हालांकि 25 की सीमा सामान्य श्रेणी के लिए है।

यानि अब सामान्य श्रेणी के 25 साल से ज्यादा और आरक्षित श्रेणी के 30 साल से ज्यादा उम्र के अभ्यर्थी अंडरग्रैजुएट मेडिकल और डेंटल कोर्सेज में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा नहीं दे सकेंगे।
विभिन्न राज्यों से जुटे 10 विद्यार्थियों एक दल ने उम्र सीमा तय करने के CBSE के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उनका कहना था कि ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज और जवाहरलाल इंस्टिट्यूट ऑफ पोस्टग्रैजुएट मेडिकल एजुकेशन ऐंड रिसर्च की प्रवेश परीक्षाओं में भाग लेने के लिए उम्र की कोई पाबंदी नहीं है।

विद्यार्थियों के इस दल की ओर से पेश हुए वकील अमित कुमार ने सीबीएसई के फैसले को गैर-कानूनी और मनमाना बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से याचिकाकर्ताओं के लिए NEET में बैठने का मार्ग प्रशस्त करने की अपील की। याचिका में कहा गया, ‘अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड और यूरोपियन यूनियन के ज्यादातर देशों, ऑस्ट्रिया समेत करीब-करीब सभी विकसित देशों में मेडिसिन की पढ़ाई के लिए कोई ऊपरी उम्र सीमा तय नहीं है, बशर्ते विद्यार्थी कोर्स करने के लिए अन्य कसौटियों पर खरा उतरता हो। इसलिए, इसका कोई औचित्य नहीं है कि भारत में 25 वर्ष से ज्यादा उम्र के कैंडिडेट्स मेडिसिन कोर्स नहीं कर सकते।’
स्टूडेंट्स ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में लॉ कोर्स में ऐडमिशन के लिए उम्र सीमा तय करने से बार काउंसिल इसी आधार पर रोका था कि सीमा तय करने का कोई तर्क नहीं है। हालांकि, जस्टिस एस एस बोबडे और जस्टिस एल नागेश्वर राव की बेंच ने इन दलीलों को खारिज करते हुए याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।

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