यहां सिर्फ 78 रुपए में बन सकते हैं मकान के मालिक, बस पूरी करनी होंगी सरकार की ये 3 शर्तें

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इन्हें ऑफर प्राइज में बेचकर कंपनी यहां आबादी बढ़ाना चाहती है। मेयर ने यहां की घटती आबादी को देखकर ये फैसला लिया है। बता दें, पिछले तीन दशक में यहां की आबादी सिर्फ 1300 रह गई है, इनमें भी ज्यादातर मिडल एज वाले कपल हैं, जिनके बच्चे बाहर रह रहे हैं। ओलोलई के मेयर ने यहां खाली पड़े 200 मकानों को बेचने का एलान किया है, ताकि लोग बाहर से आकर यहां बसें और यहां की आबादी बढ़े। हालांकि, एप्लाई करने के लिए सिर्फ एक हफ्ता ही बचा है। हालांकि, मकान खरीदने के लिए कुछ शर्तें भी हैं। खरीदारों को 23 लाख रुपए तक की अनुमानित लागत पर तीन साल के अंदर इन मकानों का नवीनीकरण कराना होगा।
दरअसल, इनमें से ज्यादातर घरों की कंडीशन बहुत खराब है, इसलिए मरम्मत जरूरी है। हालांकि, इन्हें ये छूट भी है कि पांच साल बाद वो इन मकानों को बेच सकते हैं। ऐसे में मकानों की कीमत भले कम हो लेकिन इनकी मरम्मत में खरीदारों पर एक्स्ट्रा बोझ पड़ेगा। हालांकि, इसके बाद भी यहां के मेयर इस बात को लेकर कॉन्फिडेंट हैं कि शहर की ब्यूटी और इतिहास लोगों को लुभाएगा। मेयर एफिसियो अरबाउ ने कहा कि मेरी जंग हमारी अनूठी परंपराओं को गायब होने से बचाने के लिए है। अतीत का गर्व ही हमारी ताकत है। हम हमेशा से मजबूत लोग रहे हैं और इस टाउन को मरने नहीं देंगे।
कभी बरबागिया की कैपिटल रही ओलोलई कभी बहुत गुलजार हुआ करता था। पर अब लोगों ने अपने मकान खाली छोड़ बड़े शहरों का रुख कर लिया है। लिहाजा, टाउन शांत हो चुका है। टाउन के बहुत से मकान खाली पड़े हुए हैं और दशकों से खंडहर में तब्दील होते जा रहे हैं। मेयर ने मकानों के ओनर्स से बात की उन्हें प्रॉपर्टी को टाउन अथॉरिटी को सौंपने की बात की।
जिसके बाद इन्हें मार्केट में रखा गया है। साल 2017 के आखिर तक उन्हें मकान खरीदने वालों के 120 एप्लिकेशन मिल चुके हैं। इनमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और रूस के लोग भी शामिल हैं। एप्लाई करने के लिए 7 फरवरी तक की डेडलाइन है।

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