मोदी के बढ़ते कद से डरा विपक्ष, यूपी में मायावती-अखिलेश आएंगे साथ?

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नई दिल्ली। बीजेपी के बढ़ते रुतबे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बढ़ते कद से विपक्षी दल घबराए हुए हैं और एकजुट होने की तैयारी कर रहे है। पूर्वोत्तर के चुनाव नतीजों में बीजेपी को बंपर जीत मिलने के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि बीजेपी से मुकाबले के लिए उत्तर प्रदेश में मायावती की पार्टी बसपा अब अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी को समर्थन दे सकती है। आपको बता दें कि यूपी में दो सीटों पर लोकसभा उपचुनाव होने है। फूलपुर व गोरखपुर उपचुनाव से पहले बीएसपी और एसपी साथ आ सकती है।

बीएसपी आज ही इसका एलान भी कर सकती है। इसके लिए आज इलाहाबाद और गोरखपुर में पार्टी के स्थानीय नेताओं की मीटिंग बुलाई गई है। शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर औपचारिक एलान हो सकता है। फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा सीट पर 11 मार्च को उपचुनाव है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने पहले ही उत्तर प्रदेश में होने वाले उपचुनावों में समाजवादी पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों को बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान कर चुकी है। साथ ही साथ पार्टी ने सभी धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक दलों से अपील की है कि वे भाजपा-संघ के सांप्रदायिक गठजोड़ को हराने के लिए एकजुट हो जाएं।

राकांपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रमेश दीक्षित ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। दोनों नेता के बीच करीब आधे घंटे तक बंद कमरे में प्रदेश के सियासी हालात पर चर्चा हुई थी। इसके बाद राकांपा ने बीसपी को समर्थन देने का ऐलान किया था। राकापा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दीक्षित ने एक बयान जारी कर कहा था कि मौजूदा दौर में सभी धर्मनिरपेक्ष राजनैतिक दलों की जिम्मेदारी बनती है कि वे भाजपा-संघ के गठजोड़ को परस्त करने में अपनी पूरी ताकत लगा दें। उन्होंने कांग्रेस पार्टी को भी सलाह दी और कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को समझदारी से काम लेते हुए अपने दोनों उम्मीदवारों के नाम वापस ले लेने चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक दलों की एकता के आगे फासीवादी भाजपा हार जाए। उन्होंने कहा कि भाजपा को हराने के लिए सभी लोकतांत्रिक दलों के बीच एक व्यापक एकता बनेए यही आज के वक्त की दरकार है।

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