नोटबंदी का रिकॉर्ड रखने वाले अधिकारी हाजिर हों, मुख्य सूचना आयुक्त का आदेेश

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नई दिल्ली : मुख्य सूचना आयुक्त आर के माथुर ने नोटबंदी के निर्णय से संबंधित रिकॉर्ड रखने वाले प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अधिकारियों को उनके समक्ष पेश होने के निर्देश दिए और यह बताने को कहा कि दस्तावेजों के खुलासे से देश के आर्थिक हितों पर कैसे असर पड़ेगा.

गौरतलब है कि जब आर.एल केन ने नोटबंदी मामले में आरटीआई कानून के तहत एक सवाल किया था कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500-1000 रुपए के नोटों को बंद करने और दो हजार रुपए का नया नोट जारी करने से पहले राष्ट्रपति को बताया था? इसका संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर वे सूचना आयोग से इस मामले की शिकायत की थी. उसके बाद वे सूचना मुख्य सूचना आयुक्त ने भी इस सवाल को यह कहकर खारिज कर दिया था कि उनका सवाल सूचना की परिभाषा के तहत नहीं आता है. इसी मामले में मुख्य सूचना आयुक्त ने प्रधानमंत्री कार्यालय के उन अधिकारियों को उनके सामने पेश होने का निर्देश दिया है जिनके पास नोटबंदी के संबंध में रिकॉर्ड था.

आरटीआई आवेदक आरएल केन ने मांगी थी सूचना
उल्लेखनीय है कि आरटीआई आवेदक आर.एल केन के एक अलग मामले में माथुर ने राष्ट्रपति भवन के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उनका सवाल ‘‘सूचना’’ की परिभाषा के तहत नहीं आता जिसे आरटीआई कानून के तहत पूछा जाए. उन्होंने सवाल पूछा था कि क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 500 और एक हजार रुपए के नोटों को बंद करने और दो हजार रुपए का नया नोट जारी करने के अपने निर्णय से राष्ट्रपति को अवगत कराया था. नोटबंदी पर उनके आरटीआई सवालों पर पीएमओ, राष्ट्रपति सचिवालय और वित्त मंत्रालय से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के बाद केन ने आयोग का रूख किया था.

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8 नवंबर 2016 को हुआ था नोटबंदी का ऐलान
गौरतलब है कि 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का ऐलान किया था, जिसके बाद 500 और 1000 के नोट करेंसी के चलन से बाहर हो गए थे. नोटबंदी के दौरान सरकार ने लोगों को नोट बदलने के लिए 31 दिसंबर तक का वक्त दिया था. बीजेपी और केंद्र सरकार के सदस्य नोटबंदी को देशहित में बताया, तो विपक्षी दल इसे देश का काला फैसला ठहराया. अगर एक आम नागरिक के नजरिए से देखें तो इसमें कोई दो राय नहीं है कि नोटबंदी आजाद भारत में लिया गया सबसे बड़ा आर्थिक फैसला है.

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