डॉ. कलाम के नोट्स से भारत बना रहा सबसे खतरनाक मिसाइल, सुदर्शन चक्र की तरह लौट आएगी वापस

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यह मिसाइल न सिर्फ परमाणु बम ले जाने में सक्षम होगी, बल्कि अपने लक्ष्य को तबाह करने के बाद वापस लौट आएगी। अभी तक दुनिया का कोई भी देश ऐसी मिसाइल नहीं बना पाया है। भारतीय वैज्ञानिक इस मिसाइल को बनाने के काफी करीब पहुंच चुके हैं।

पिछले साल Brahmos मिसाइल प्रोजेक्ट के संस्थापक CEO और MD रहे डॉ. ए एस पिल्लई ने खुद एक कार्यक्रम में कहा था कि जिस मिसाइल को लोग ‘स्वप्न’ के नाम से बुलाते हैं, उसका नाम स्वप्न नहीं बल्कि ब्रह्मोस-2 होगा। ये मिसाइल अपने लक्ष्य को तबाह करने के बाद भगवान कृष्ण के सुदर्शन चक्र की तरह लौटकर वापस आ जाएगी। वैसे तो इस मिसाइल का विकास काफी लंबे समय से हो रहा था, लेकिन अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जब भारत की मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम यानि MTCR में एंट्री करवाई, तब से इस दिशा में काम तेज हो गया है।

भारतीय वैज्ञानिकों को इस मिसाइल की तकनीक विकसित करने में काफी हद तक सफलता मिल चुकी है। फिलहाल मिसाइल के डिजाइन पर काम किया जा रहा है, जो सबसे बड़ी चुनौती है। इस मिसाइल के विकास की कमान फिलहाल ब्रह्मोस एयरोस्पेस इंडिया लिमिटेड के पास है। स्क्रैमजैट इंजन से लैस ये मिसाइल दुनिया की सबसे तेज मिसाइलों में से एक होगी। इसकी रफ्तार मैक 7 यानि लगभग 8675 किमी प्रतिघंटे होगी, यानि दुनिया के किसी भी शहर को निशाना बनाने के लिए इस मिसाइल को ज्यादा से ज्यादा 1 से 2 घंटे का समय लगेगा। हालांकि, अभी शुरुआती विकास के दौरान इस मिसाइल की मारक क्षमता 500 किमी के आसपास रखी जाएगी, जिसे बाद में बढ़ाया जाएगा।

बता दें कि इस बेहतरीन मिसाइल को तैयार करने का विचार सबसे पहले भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को आया था। उन्होंने ही इस मिसाइल के कॉन्सेप्ट पर बात की थी और अब धीरे-धीरे ये मिसाइल अपना मूर्त रूप ले रही है। प्रोजेक्ट से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर सबकुछ ठीक रहा तो ब्रह्मोस सीरीज की आने वाली मिसाइलें लक्ष्य भेदकर वापस लौटने वाली दुनिया की पहली मिसाइल बन जाएगी।

ब्रह्मोस एरोस्पेस के अनुसार, पूरी दुनिया के पास अभी तक ऐसी मिसाइलें हैं, जो लक्ष्य भेदने के साथ वहीं पर समाप्त हो जाती हैं। लेकिन हम ठीक वैसी मिसाइल बना रहे हैं, जैसे सुदर्शन चक्र दुश्मन पर वार कर वापस लौट आता था।

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