जब जज अरुण मिश्रा जब बैठक में चीफ जस्टिस के सामने रो पड़े

0
86

नई दिल्ली : चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा के साथ सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की सोमवार को हुई मुलाकात के दौरान कई भावुक क्षण आए. कहा जा रहा है कि जस्टिस अरुण मिश्रा यह कहते हुए रो पड़े कि मामला उठाने वाले चार न्यायाधीशों ने उनकी ‘क्षमता’ व ‘ईमानदारी’ पर सवाल उठाकर उन्हें ‘अनुचित रूप से’ निशाना बनाया.

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने कहा, उन पर काम का बहुत बोझ है
उन्होंने कहा कि भले ही चारों न्यायाधीशों ने उनका नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने दिवंगत न्यायाधीश बीएच लोया के मामले समेत जिन मामलों का जिक्र किया, उनसे यही नतीजा निकला. न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने कहा कि वह बहुत मेहनत से काम कर रहे हैं और उनके ऊपर काम का बहुत बोझ भी है. उन्होंने कहा कि इससे पहले के प्रधान न्यायाधीशों टीएस ठाकुर और जेएस खेहर ने भी उन्हें बहुत मुश्किल मामले सौंपे थे.
जज लोया का मामला मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध
सुप्रीम कोर्ट के चारों जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जज लोया केस को जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच को दिए जाने पर सवाल भी उठाए थे. हालांकि सुप्रीम कोर्ट की मुकदमों की सूची में ये मामला मंगलवार को सूचीबद्ध है, लेकिन ये तय नहीं है कि जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस शांतनगौडार की बेंच ही इस मामले की सुनवाई करेगी.

सीजेआई जस्टिस अरुण मिश्रा को अपने चैंबर में ले गए
ऐसा होने पर न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर (मामले को उठाने वाले चार न्यायाधीशों में से एक) ने न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा के कंधे पर हाथ रखा और कहा कि वे लोग उनके खिलाफ नहीं हैं, वे मुद्दा उठाना चाह रहे थे. इस पर सीजेआई न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा को अपने चैंबर में ले गए. बाद में एक वकील आरपी लूथरा ने प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली कोर्ट नंबर वन के समक्ष कहा कि ‘संस्थान को नष्ट करने की साजिश हो रही है और प्रधान न्यायाधीश चारों न्यायाधीशों के खिलाफ कार्रवाई करें’. इस पर प्रधान न्यायाधीश मुस्कराए और खामोश रहे.

SC के चार जजों ने सीजेआई पर लगाए थे आरोप
उल्‍लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय में शीर्ष स्तर पर मतभेद तब उजागर हो गया, जब इसके चार वरिष्ठ न्यायाधीशों ने सार्वजनिक रूप से बीते शुक्रवार को प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर मामलों को उचित पीठ को देने के नियम का सख्ती से पालन नहीं करने का आरोप लगाया. न्यायाधीशों ने कहा कि इससे सर्वोच्च न्यायालय की ईमानदारी पर संदेह पैदा हो सकता है. न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर के आवास पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए न्यायाधीशों ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का प्रशासन ठीक से काम नहीं कर रहा है और उन्होंने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा को लिखे बिना तिथि वाले एक पत्र जारी किया जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधान न्यायाधीश सर्वेसर्वा (मॉस्टर ऑफ रॉस्टर) हैं, लेकिन यह “प्रधान न्यायाधीश के उनके सहकर्मियों पर कानूनी या तथ्यात्मक रूप से किसी अधिकार को मान्यता नहीं है”.



जजों ने कहा था, हम यह कदम उठाने पर मजबूर हुए हैं
सर्वोच्च न्यायालय में वरिष्ठता के आधार पर दूसरे नंबर के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर के आवास पर जल्दबाजी में बुलाए गए संवाददाता सम्मेलन में न्यायाधीशों ने कहा, “यह भारतीय न्याय व्यवस्था, खासकर देश के इतिहास और यहां तक कि सर्वोच्च न्यायालय के लिए एक असाधारण घटना है. हमें इसमें कोई खुशी नहीं है, जो हम यह कदम उठाने पर मजबूर हुए हैं. सर्वोच्च न्यायालय का प्रशासन ठीक से काम नहीं कर रहा है. पिछले कुछ महीनों में ऐसा बहुत कुछ हुआ है, जो नहीं होना चाहिए था. देश और संस्थान के प्रति हमारी जिम्मेदारी है. हमने प्रधान न्यायाधीश को संयुक्त रूप से समझाने की कोशिश की कि कुछ चीजें ठीक नहीं हैं और तत्काल उपचार की आवश्यकता है”. न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने कहा, “दुर्भाग्यवश इस संस्थान को बचाने के कदम उठाने के लिए भारत के प्रधान न्यायाधीश को राजी करने की हमारी कोशिश विफल साबित हुई है”.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here