चीन ने डोकलाम पर कहा; भारत के साथ रिश्तों को देते हैं अहमियत, लेकिन संप्रभुता पर समझौता नहीं होगा

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बीजिंग: चीन के विदेशमंत्री वांग यि ने शनिवार (3 फरवरी) को कहा कि उनका देश भारत के साथ अच्छे पड़ोसी वाले रिश्ते और दोस्ती को हमेशा महत्व देता है लेकिन अपने ‘‘संप्रभु अधिकारों’’, हितों और क्षेत्रीय अखंडता को बुलंद रखने पर दृढ़ है. वांग ने कहा कि चीन ‘‘संयम’’ के साथ डोकलाम गतिरोध से निबटा और यह दर्शाता है कि वह भारत के साथ अपने रिश्तों को कितना महत्व देता है. चीनी विदेशमंत्री ने ‘चाइनीज इंटरनेशनल स्टडीज’ पत्रिका में प्रकाशित अपने लंबे लेख में प्रमुख देशों के साथ चीन के रिश्तों और अपनी कूटनीतिक पहलों की चर्चा की. पत्रिका का प्रकाशन चीनी विदेश मंत्रालय से जुड़े थिंक टैंक ‘चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज’ करता है. उन्होंने भारत के साथ चीन के रिश्तों की चर्चा की और कहा कि भारत के साथ चीन के कूटनीतिक संवाद के चलते भारत ने डोकलाम से अपने सैनिक और उपकरण हटाए.

डोकलाम पर चीन और भारत के बीच 73 दिन तक गतिरोध चला. इसमें भूटान ने भी अपनी दावेदारी की. वांग ने कहा कि चीन भारत के साथ अच्छे पड़ोसी वाले रिश्ते और दोस्ती को हमेशा महत्व देता है क्योंकि ‘‘हम एक-दूसरे के बड़े पड़ोसी और प्राचीन संस्कृतियां हैं. उन्होंने कहा, ‘‘हमने चीन के दोंग लोंग (डोकलाम) क्षेत्र में भारतीय सीमा सैनिकों की घुसपैठ का मुद्दा अपने राष्ट्रीय हित में, न्यायपूर्ण आधार पर और संयंम से निबटाया. कूटनीतिक माध्यम से हमने भारतीय पक्ष के साथ संवाद किया और उसने अपने उपकरण एवं कर्मी हटाए.’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह दिखाता है कि हम भारत के साथ अपने रिश्तों को न सिर्फ महत्व और उनपर जोर देते हैं, बल्कि यह क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता के प्रति हमारी ईमानदारी और जिम्मेदारी की भावना को भी प्रदर्शित करता है.’’

चीन सरकार द्वारा संचालित एक जाने माने थिंक टैंक के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि मोदी सरकार के तहत भारत की विदेश नीति चुस्त अैर निश्चयपूर्ण हो गई तथा साथ ही उसकी जोखिम लेने की क्षमता भी उभार पर है. चीनी विदेश मंत्रालय से संबद्ध थिंक टैंक चाइना इंस्टिट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज (सीआईआईएस) के उपाध्यक्ष रोंग यिंग ने कहा कि विगत तीन साल में भारत की कूटनीति चुस्त और निश्चयपूर्ण हो गई है तथा इसने एक विशिष्ट एवं अद्वितीय ‘‘मोदी सिद्धांत’’ स्थापित किया है, जो नई स्थिति में एक महान शक्ति के रूप में भारत के उभार के लिए है. सीआईआईएस पत्रिका में प्रकाशित एक लेख में रोंग ने चीन, दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भारत के संबंधों, अमेरिका तथा जापान के साथ भारत के करीबी संबंधों पर समीक्षात्मक नजरिया पेश करते हुए कहा कि मोदी के तहत भारत की विदेश नीति पारस्परिक लाभों की पेशकश करते हुए अधिक निश्चयपूर्ण हो गई है.


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