गोपालदास सक्सेना ‘नीरज’ का आज 94वां जन्मदिन, यहां पढ़ें उनकी कुछ चुनिंदा कविताएं

0
215

‘एक कालखंड और बीत गया/ रह गया अगीत शेष, गीत गया/बूंद-बूंद कर यूं ही जीवन घट रीत गया/ एक कालखंड और बीत गया।’ इन पंक्तियों के रचयिता पद्मभूषण गोपालदास नीरज गुरुवार को अपना 94वां जन्मदिन मनाएंगे। गोपालदास सक्सेना ‘नीरज’ का जन्म 4 जनवरी 1925 को आगरा में हुआ। गोपालदास महाकवि होने के साथ-साथ एक शिक्षक और फिल्मों के गीतों की लेखक भी हैं। यही वजह है कि सरकार ने इन्हें पहले पद्म श्री और फिर पद्म भूषण से नवाजा। इन्होंने ‘नई उमर की नई फसल’ ‘मेरा नाम जोकर, ‘शर्मीली’ और ‘प्रेम पुजारी’ जैसी फिल्मों के लिए गाने लिखें। महाकवि गोपालदास नीरज का स्वास्थ्य पिछले दिनों खराब हो गया था। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां पढ़ें उनकी कुछ चुनिंदा कविताएं:

एक कालखंड और बीत गया…
रह गया अगीत शेष,गीत गया…

बाल कुछ सफ़ेद हुए और आज केशों में
लोग मुझे गिनने लगे अब तो अवशेषों में

शायद मैं हार गया और समय जीत गया…
एक कालखंड और बीत गया…

जब मुझको हसना था तब तो मैं रोया
थोडा कुछ पाने को बहुत बहुत खोया

बूँद बूँद कर यु ही जीवन घट रीत गया…
एक कालखंड और बीत गया…

#नीरज

आदमी को आदमी बनाने के लिए
जिंदगी में प्यार की कहानी चाहिए
और कहने के लिए कहानी प्यार की
स्याही नही,आँखों वाला पानी चाहिए।

जो भी कुछ लुटा रहे हो तुम यहाँ
वो ही बस तुम्हारे साथ जाएगा,
जो छुपाके रखा है तिजोरी में
वो तो धन न कोई काम आएगा,
सोने का ये रंग छूट जाना है
हर किसी का संग छूट जाना है
आखिरी सफर के इंतजाम के लिए
जेब भी कफन में इक लगानी चाहिए।

आदमी को आदमी बनाने के लिए
जिंदगी में प्यार की कहानी चाहिए।।

रागिनी है एक प्यार की
जिंदगी कि जिसका नाम है
गाके गर कटे तो है सुबह
रोके गर कटे तो शाम है
शब्द और ज्ञान व्यर्थ है
पूजा-पाठ ध्यान व्यर्थ है
आँसुओं को गीतों में बदलने के लिए,
लौ किसी यार से लगानी चाहिए

आदमी को आदमी बनाने के लिए
जिंदगी में प्यार की कहानी चाहिए।।

जो दु:खों में मुस्कुरा दिया
वो तो इक गुलाब बन गया
दूसरों के हक में जो मिटा
प्यार की किताब बन गया,
आग और अँगारा भूल जा
तेग और दुधारा भूल जा
दर्द को मशाल में बदलने के लिए
अपनी सब जवानी खुद जलानी चाहिए।

आदमी को आदमी बनाने के लिए
जिंदगी में प्यार की कहानी चाहिए।।

दर्द गर किसी का तेरे पास है
वो खुदा तेरे बहुत करीब है
प्यार का जो रस नहीं है आँखों में
कैसा हो अमीर तू गरीब है
खाता और बही तो रे बहाना है
चैक और सही तो रे बहाना है
सच्ची साख मंडी में कमाने के लिए
दिल की कोई हुंडी भी भुनानी चाहिए।

आदमी को आदमी बनाने के लिए
जिन्दगी में प्यार की कहानी चाहिए।।

#नीरज

(गोपालदास सक्सेना ‘नीरज’ की फेसबुक से)

दर्द दिया है, अश्रु स्नेह है, बाती बैरिन श्वास है,
जल-जलकर बुझ जाऊँ, मेरा बस इतना इतिहास है !

मैं ज्वाला का ज्योति-काव्य
चिनगारी जिसकी भाषा,
किसी निठुर की एक फूँक का
हूँ बस खेल-तमाशा

पग-तल लेटी निशा, भाल पर
बैठी ऊषा गोरी,
एक जलन से बाँध रखी है
साँझ-सुबह की डोरी

सोये चाँद-सितारे, भू-नभ, दिशि-दिशि स्वप्न-मगन है
पी-पीकर निज आग जग रही केवल मेरी प्यास है !
जल-जलकर बुझ जाऊँ, मेरा बस इतना इतिहास है !!

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here