ओमान की धरती पर गरजे पीएम मोदी, बोले- मैं चायवाला, चाय से भी कम कीमत पर दिया हेल्थ इंश्योरेंस

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यहां प्रधानमंत्री मोदी ने लगभग 25,000 भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित किया। पीएम के स्टेज पर पहुंचते ही भारतीय समुदाय के लोगों ने गर्मजोशी के साथ मोदी-मोदी के नारे लगाकर उनका स्वागत किया। पीएम मोदी ने ओमान में पहली बार 6 भाषाओं में भारतीय समुदाय के लोगों से नमस्कार करके भारत माता की जय के नारे लगवाए।
पीएम ने अपने संबोधन में भारतीय समुदाय के लोगों से कहा कि एक लंबे अर्से से मेरा आप लोगों से मिलने का मन कर रहा था पर वो अवसर आज आया है। उन्होंने कहा कि मैं सबको विश्वास दिलाता हूं कि भारत के लिए जो सपने आप देख रहें, मैं उन सबको पूरा करूंगा।
पीएम ने अपने भाषण में आगे कहा कि हिंदुस्तान के लोग जो ठान लेते हैं वो करके ही दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि मैं चाय वाला हूं, जानता हूं कि 90 पैसे में चाय भी नहीं मिलती है लेकिन सरकार ने 5 लाख रुपये की हेल्थ बीमा योजना दी है। हिंदुस्तान के अखबारों ने हमारी हेल्थ बीमा योजना को मोदी केयर का नाम दिया है। बजट में हमने एक ऐसी योजना का ऐलान किया जो पूरी दुनिया का ध्यान खींच रही है।

बता दें कि पीएम मोदी का यह पहला ओमान दौरान है। यहां करीब 8 लाख भारतीय रहते हैं। ओमान की कुल आबादी 44 लाख के आसपास है जिनमें 20 फीसदी तादाद भारतीयों की है। ओमान करीब मध्य प्रदेश राज्य जितना बड़ा है। यहां का क्षेत्रफल तीन लाख नौ हजार वर्ग किलोमीटर है।
गौरतलब है कि इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट में हिस्सा लिया था। इस दौरान अपने संबोधन में उन्होंने कहा था कि ‘इस समिट के 6वें एडिशन में चीफ गेस्ट के तौर पर बुलाने के लिए 125 करोड़ भारतीयों की तरफ से शुक्रिया।’

पीएम ने सम्मेलन के दौरान ‘आनंद’ के द्वार तक पहुंचने का मंत्र भी दिया। मोदी ने कहा ‘हमें 6 R का पालन करने की आवश्यकता है। रिड्यूस,रेस्क्यू, रीसाइकल,रिकवर, रीडिजाइन और रीमैन्युफैक्चर को फॉलो करें, जो हमें ‘आनंद’ के द्वार तक पहुंचा सकता है।’
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा ‘बीते 25 वर्षों में भारत में मातृ मृत्यु दर एक तिहाई की कमी देखी गई तो वहीं विश्व में यह आधी हो चुकी है। तकनीक तो विचारों की तरह तेजी से बदल रही है। तकनीक ने लोगों के जीवन में अभूतपूर्व परिवर्तन आ गया है।’
उन्होंन कहा ‘विकास का पहलू ये भी है कि पाषाण युग से औद्योगिक क्रांति के सफर में हजारों साल गुजर गए। उसके बाद संचार क्रांति तक सिर्फ 200 वर्षों का समय लगा। और वहां से डिजिटल क्रांति का फासला कुछ ही सालों में तय हो गया।’

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