आज चार जजों से मुलाकात सकते हैं! CJI दीपक मिश्रा

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भारत की न्यायपालिका में शुक्रवार को आया भूचाल आज थम सकता है. सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने मीडिया के सामने आकर कोर्ट प्रशासन और चीफ जस्टिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए थे. बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने इस मुद्दे को सुलझाने की पहल की है. शनिवार शाम बार काउंसिल ने एक बैठक कर सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों से मिलने का फैसला किया. सभी जजों से चर्चा के बाद काउंसिल के पदाधिकारी उन चारों जजों से भी मुलाकात करेंगे जिन्होंने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाया था. इसके बाद काउंसिल चीफ जस्टिस से मुलाकात करेगी.

शनिवार को सारा दिन इस मुद्दे पर गहमागहमी और कयासों के बीच गुजरा. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की बैठक की खबरें आती रहीं कि बैठक के लिए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल निकल चुके हैं. प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा चीफ जस्टिस से मिल रहे हैं, आदि-आदि. शाम तक चर्चाओं का बाजार गर्म रहा, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला. उधर, न्यायपालिका प्रशासन पर उंगली उठाने वाले चार जजों में शामिल जस्टिस कुरियन जोसेफ ने भी साफ कर दिया है कि उनका किसी से कोई टकराव या विरोध नहीं है. उन्होंने जो मुद्दे उठाए हैं, वे सब आपस में मिल-बैठकर सुलझा लिए जाएंगे. केरल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि हम न्याय और न्यायपालिका के हित में खड़े हुए हैं. न्यायपालिका में लोगों का भरोसा जीतने के लिए यह किया.

इस विवाद पर जानें 10 बातें-

1-शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के चार जज न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एमबी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा द्वारा मामलों के आवंटन समेत कई मामले उठाए थे. न्यायपालिका के इतिहास में ऐसा पहली बार हुए जब जजों ने मीडिया के सामने मुद्दे उठाए.

2-जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा, ‘हमने किसी काम को सही तरीके से करने के लिए कहा था. कुछ महीने पहले हम चारों जजों ने चीफ जस्टिस को एक चिट्ठी लिखी थी. हमारी कोशिशें नाकामयाब रहीं. जब कोई विकल्‍प नहीं बचा तो हम आपके सामने आए हैं. देश का लोकतंत्र खतरे में है’.

3-जजों ने आरोप लगाए कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा उस उस परंपरा से बाहर जा रहे हैं, जिसके अंतर्गत अहम मामलों में फैसले सामूहिक तौर पर लिए जाते रहे हैं. केसों के बंटवारे में चीफ जस्टिस नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट की अखंडता को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मामलों को मुख्‍य न्‍या‍याधीश बिना किसी वाजिब कारण के अपनी पसंद की बेंचों को सौंप देते हैं. इससे संस्थान की छवि बिगड़ी है.

4-जजों ने मुख्य न्यायधीश को चिट्ठी भी लिखी और उन्होंने वही चिट्ठी मीडिया को भी दी. जजों ने कहा कि लोकतंत्र खतरे में है और अगर सुप्रीम कोर्ट नहीं बचेगा तो लोकतंत्र भी नहीं बचेगा.

5-जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद न्यायपालिका और राजनीति में भूचाल आ गया. खुद प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद से बात की. प्रधानमंत्री ने प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा ने चीफ जस्टिस से मुलाकात की. अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि मामला जल्द सुलझा लिया जाएगा.

6-राजनीतिक बयानबाजी भी खूब हुई. भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने चारों जजों की भावनाओं का सम्मान करने की बात कही है. उन्होंने कहा कि इन चारों जजों का लीगल करियर साफ सुथरा रहा है और इन्होंने कभी भी पैसे को महत्व नहीं दिया. कांग्रेस ने इस घटना को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया.

7-भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जज कहते हैं कि  लोकतंत्र खतरे है, तो हमें उनके शब्दों को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि हर नागरिक, जो लोकतंत्र में विश्वास रखता है, उसे खुल कर  बोलना चाहिए.

8-शनिवार को चीफ जस्टिस, बार एसोसिएशन तथा चारों जजों के बीच बैठक भी होनी थी, लेकिन चार में तीन जजों के दिल्ली से बाहर होने के कारण बैठक नहीं हो पाई. शाम को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने मुद्दा सुलझाने की पहल की.

9-सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने कहा कि नहीं चाहते कि ऐसे मामले सार्वजनिक रूप से हल नही किए जाने चाहिएं. यह न्यायपालिका का आंतरिक मामला है और आपस में ही इसे सुझाना चाहिए.

10-बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने इस संकट पर चर्चा करने के लिए सात सदस्यीय दल का गठन किया है. ये सात सदस्य सभी जजों से मुलाकात कर बीच का रास्ता खोजेंगे.

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