अब गौमूत्र का उपयोग घातक बीमारियों के इलाज में करेगी यूपी सरकार

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फर्श क्लीनर बनाने के बाद यूपी सरकार अब गौमूत्र से दवाएं बनाने की जुगत में लग गई है. आयुर्वेद विभाग के निदेशक आर आर चौधरी ने बताया कि उनके विभाग ने गौमूत्र का प्रयोग करके 8 दवाएं बनाई हैं, जो लीवर के रोग, जोडों के दर्द व रोग प्रतिरोधक दवाएं बनाने में काम आएंगी. प्रदेश में आयुर्वेद विभाग की दो फार्मेसी हैं, एक पीलीभीत में दूसरी लखनऊ में. इन दोनों जगहों पर कुछ प्राइवेट इकाइयों के साथ गौमूत्र, गाय के घी व दूध से दवाएं तैयार की जा रही हैं.

प्रदेश में बांदा, झांसी, मुज़फ्फरनगर, इलाहाबाद, वाराणसी, बरेली, लखनऊ व पीलीभीत में कुल 8 मेडिकल कॉलेज हैं. इन मेडिकल कॉलेजों में गोमूत्र व गाय के अन्य उत्पादों से बनी दवाइयां सप्लाई की जाती हैं.

श्री चौधरी ने बताया कि गौमूत्र आयुर्वेद का महत्त्वपूर्ण अंग है. हमारी कोशिश है कि हम गौमूत्र व गाय से मिलने वाले अन्य उत्पादों जैसे घी, दूध इत्यादि का प्रयोग करके कई और तरह की दवाइयां बनाई जाएं.

उन्होंने बताया कि इसमें समस्या ये है कि अभी तक प्रदेश में केवल दो फॉर्मेसी हैं, इसलिए अभी इन दवाओं का उत्पादन कम हो रहा है. हालांकि प्राइवेट सेक्टर में कई कंपनियां गौमूत्र का प्रयोग करके दवाएं बनाने में लगी हैं, जो कि इन मेडिकल कॉलेजों को सप्लाई किया जाता है. विभाग अभी कुछ नई फॉर्मेसी खोलने वाला है और मेडिकल कॉलेजों में पोस्ट ग्रेजुएट व एमडी कार्यक्रम शुरू करेगा.
पिछले साल योगी आदित्यनाथ ने गौमूत्र का उपयोग करके फर्श क्लीनर बनाने का प्रस्ताव रखा था.
जुलाई 2017 में केंद्र ने गौमूत्र व गाय से मिलने वाले अन्य उत्पादों का प्रयोग करके दवाएं बनाने पर विचार करने के लिए 19 सदस्यों का एक पैनल बनाया था. इस पैनल में तीन सदस्य वीएचपी व आरएसएस से संबंधित थे.

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री हर्ष वर्धन की अध्यक्षता में बनी इस कमेटी को ज़िम्मेदारियां दी गई थीं कि वो पंचगव्य ( गाय का गोबर, गौमूत्र, दूध, दही व घी) का प्रयोग करके स्वास्थ्य, कृषि व अन्य क्षेत्रों में इसके बेहतरीन उपयोग करने का पता लगाए. सरकार ने इस प्रोजेक्ट का नाम SVAROP (साइंटिफिक वैलीडेशन एंड रिसर्च ऑन पंचगव्य) रखा है.

इस कमेटी का नाम नेशनल स्टीयरिंग कमेटी है जिसमें विज्ञान व तकनीक विभाग, बायोटेकनॉलजी, नवीन और नवीकरणीय मंत्रालय के सचिव भी शामिल थे. इसमें तीन सदस्य ‘विज्ञान भारती’ व ‘गौ विज्ञान अनुसंधान केंद्र’ से भी थे.

इस कमेटी में सीएसआईआर के निदेशक आर ए माशेलकर भी थे जो कि बासमती चावल और हल्दी के अमेरिकी पेटेंट का विरोध करने के लिए जाने जाते हैं. ये कमेटी देसी गायों के महत्त्व व पंचगव्य की वैज्ञानिक वैधता पर विचार करेगा.

यूपी सरकार ने इसके मद्देनज़र 7 ज़िलों में 1000 गायों की क्षमता वाली गौशालाएं बनाने का निश्चय किया है. इन गौशालाओं की देख-रेख के लिए ज़िलाधिकारियों अधीन कमेटी गठित की जायेगी. सबसे पहले सरकार बुंदेलखंड के सात ज़िलों में इस प्रोजेक्ट को शुरू करना चाहती है जिसके लिए सरकार खुद अपनी ज़मीनें खाली करवाने पर विचार कर रही है.

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