अगले साल से ट्रेनों की रफ्तार पर नहीं पड़ेगी कोहरे की मार

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ठंड में ट्रेनों की रफ्तार पर हर साल कोहरे की मार पड़ती है। इस साल भी एक दिसंबर से 46 ट्रेनों को ढाई महीने के लिए रद्द करना पड़ा, लेकिन अगले साल से हालात बदले हुए होंगे। रेलवे ने कोहरे से निपटने के लिए देश में पहली बार आधुनिकतम तकनीक यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम-2 (ईटीसीएस) का प्रयोग करने का फैसला किया है। अब ट्रेन चालक को कोहरे में गाड़ी की रफ्तार कम कर ट्रैक किनारे लगे सिग्नल देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
ईटीसीएस-2 में ट्रेन ड्राइवर के केबिन में ही ड्राइवर मशीन इंटरफेस (डीएमआई) नाम की स्क्रीन लगी है जो बाहर लगे सिग्नल के पास आने से पहले उसके संकेत पकड़ लेगी। यही नहीं, सिग्नल लाल होने पर गाड़ी में अपने आप ब्रेक लग जाएगा। इसीलिए इसे कैब सिग्नलिंग भी कहते हैं। यूरोप और अमेरिका की ट्रेनों में लगे ईटीसीएस-2 को एक खरब फेरों में से एक दुर्घटना की आशंका पर भी खरा पाया गया है। पिछले सप्ताह रेलवे बोर्ड ने 12 हजार करोड़ रुपये की लागत की इस परियोजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत 6 हजार इंजनों में यह डिवाइस लगाई जाएगी। साथ ही नौ हजार किमी. के गोल्डन क्वाड्रैंगल ट्रैक के किनारे के सिग्नल इससे जोड़े जाएंगे, जिससे कि उनसे निकलने वाली तरंगों के इंजन के अंदर लगी डीएमआई पकड़ ले। चूंकि देश का लगभग 70 फीसदी ट्रेन ट्रैफिक इसी ट्रैक पर है, इसलिए कोहरे की समस्या काफी हद तक हल हो जाएगी। यूरोप, अमेरिका और स्कैंडेवियन देशों में भारी कोहरा और बर्फबारी से कई बार विजिबिलिटी महज कुछ फिट रह जाती है। वहां ईटीसीएस-2 की मदद से ट्रेनें समय पर और अपनी स्पीड पर चलाई जा रही हैं।

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